Mansarovar 2 (मानसरोवर 2, Hindi)

प्रेमचंद की मशहूर कहानियाँ

Nonfiction, Reference & Language, Foreign Languages, Indic & South Asian Languages, Fiction & Literature, Short Stories, Classics
Cover of the book Mansarovar 2 (मानसरोवर 2, Hindi) by Munshi Premchand, GENERAL PRESS
View on Amazon View on AbeBooks View on Kobo View on B.Depository View on eBay View on Walmart
Author: Munshi Premchand ISBN: 9789380914985
Publisher: GENERAL PRESS Publication: July 2, 2018
Imprint: GENERAL PRESS Language: English
Author: Munshi Premchand
ISBN: 9789380914985
Publisher: GENERAL PRESS
Publication: July 2, 2018
Imprint: GENERAL PRESS
Language: English

"कहते हैं जिसने प्रेमचंद नहीं पढ़ा उसने हिन्दुस्तान नहीं पढ़ा।
प्रेमचंद ने 14 उपन्यास व 300 से अधिक कहानियाँ लिखीं। उन्होंने अपनी सम्पूर्ण कहानियों को 'मानसरोवर' में संजोकर प्रस्तुत किया है। इनमें से अनेक कहानियाँ देश-भर के पाठ्यक्रमों में समाविष्ट हुई हैं, कई पर नाटक व फ़िल्में बनी हैं जब कि कई का भारतीय व विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
अपने समय और समाज का ऐतिहासिक संदर्भ तो जैसे प्रेमचंद की कहानियों को समस्त भारतीय साहित्य में अमर बना देता है। उनकी कहानियों में अनेक मनोवैज्ञानिक बारीक़ियाँ भी देखने को मिलती हैं। विषय को विस्तार देना व पात्रों के बीच में संवाद उनकी पकड़ को दर्शाते हैं। ये कहानियाँ न केवल पाठकों का मनोरंजन करती हैं बल्कि उत्कृष्ट साहित्य समझने की दृष्टि भी प्रदान करती हैं।
ईदगाह, नमक का दारोगा, पूस की रात, कफ़न, शतरंज के खिलाड़ी, पंच-परमेश्वर, आदि अनेक ऐसी कहानियाँ हैं जिन्हें पाठक कभी नहीं भूल पाएँगे।
(अगर किताब पसंद आई हो तो Please Review डालना न भूलें।)

 

View on Amazon View on AbeBooks View on Kobo View on B.Depository View on eBay View on Walmart

"कहते हैं जिसने प्रेमचंद नहीं पढ़ा उसने हिन्दुस्तान नहीं पढ़ा।
प्रेमचंद ने 14 उपन्यास व 300 से अधिक कहानियाँ लिखीं। उन्होंने अपनी सम्पूर्ण कहानियों को 'मानसरोवर' में संजोकर प्रस्तुत किया है। इनमें से अनेक कहानियाँ देश-भर के पाठ्यक्रमों में समाविष्ट हुई हैं, कई पर नाटक व फ़िल्में बनी हैं जब कि कई का भारतीय व विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
अपने समय और समाज का ऐतिहासिक संदर्भ तो जैसे प्रेमचंद की कहानियों को समस्त भारतीय साहित्य में अमर बना देता है। उनकी कहानियों में अनेक मनोवैज्ञानिक बारीक़ियाँ भी देखने को मिलती हैं। विषय को विस्तार देना व पात्रों के बीच में संवाद उनकी पकड़ को दर्शाते हैं। ये कहानियाँ न केवल पाठकों का मनोरंजन करती हैं बल्कि उत्कृष्ट साहित्य समझने की दृष्टि भी प्रदान करती हैं।
ईदगाह, नमक का दारोगा, पूस की रात, कफ़न, शतरंज के खिलाड़ी, पंच-परमेश्वर, आदि अनेक ऐसी कहानियाँ हैं जिन्हें पाठक कभी नहीं भूल पाएँगे।
(अगर किताब पसंद आई हो तो Please Review डालना न भूलें।)

 

More books from GENERAL PRESS

Cover of the book The Wit and Wisdom of Gandhi by Munshi Premchand
Cover of the book Gitanjali (Global Classics) by Munshi Premchand
Cover of the book World's Best Short Stories 10 by Munshi Premchand
Cover of the book World's Best Short Stories 6 by Munshi Premchand
Cover of the book The Three Fates by Munshi Premchand
Cover of the book World's Best Short Stories 3 by Munshi Premchand
Cover of the book Be What You Wish by Neville Goddard by Munshi Premchand
Cover of the book Bade Ghar Ki Beti (बड़े घर की बेटी) by Munshi Premchand
Cover of the book Meditation and Its Methods by Munshi Premchand
Cover of the book The Complete Work of Sherlock Holmes II (Global Classics) by Munshi Premchand
Cover of the book As You Like It by Munshi Premchand
Cover of the book When Our Worlds Collide by Munshi Premchand
Cover of the book Madhubala by Munshi Premchand
Cover of the book The Curse of that Night by Munshi Premchand
Cover of the book World's Best Short Stories 9 by Munshi Premchand
We use our own "cookies" and third party cookies to improve services and to see statistical information. By using this website, you agree to our Privacy Policy