Meri Kahaniyan-Ravindra Kaliya (Hindi Stories)

मेरी कहानियाँ-रवीन्द्र कालिया

Nonfiction, Reference & Language, Foreign Languages, Indic & South Asian Languages, Fiction & Literature, Short Stories, Historical
Cover of the book Meri Kahaniyan-Ravindra Kaliya (Hindi Stories) by Ravindra Kaliya, रवीन्द्र कालिया, Bhartiya Sahitya Inc.
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Author: Ravindra Kaliya, रवीन्द्र कालिया ISBN: 9781613012062
Publisher: Bhartiya Sahitya Inc. Publication: February 10, 2013
Imprint: Language: Hindi
Author: Ravindra Kaliya, रवीन्द्र कालिया
ISBN: 9781613012062
Publisher: Bhartiya Sahitya Inc.
Publication: February 10, 2013
Imprint:
Language: Hindi
मैंने और मेरी पीढ़ी के अन्य कथाकारों ने थोक में कहानियां नहीं लिखीं। किसी ने पचास तो किसी ने दो कम या दो ज़्यादा। इस मामले में हमारी पीढ़ी के कथाकार बहुत खुशनसीब थे कि इन थोड़ी-सी कहानियों में प्रायः अधिसंख्य कहानियाँ चर्चित रहीं, चालीस बरस बाद आज भी चर्चा में आ जाती हैं। मैंने अपने मित्रों, अज़ीज़ लेखकों, युवा लेखकों और युवा आलोचकों की राय से जो दस कहानियाँ चुनी हैं, वे इस संकलन में शामिल की जा रही हैं। अपनी कहानियों की गुणवत्ता का बखान करना या उनका मूल्यांकन करना यहाँ अभीष्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह एक अटपटा और दुविधापूर्ण काम है। आप कितना भी बचाकर यह काम करें, किसी न किसी कोण से हास्यास्पद हो ही जाएगा। यह काम मैं अपने सुधी पाठकों को सौंपता हूँ। वही तय करेंगे कि उन्हें ये कहानियाँ कैसी लगीं।
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मैंने और मेरी पीढ़ी के अन्य कथाकारों ने थोक में कहानियां नहीं लिखीं। किसी ने पचास तो किसी ने दो कम या दो ज़्यादा। इस मामले में हमारी पीढ़ी के कथाकार बहुत खुशनसीब थे कि इन थोड़ी-सी कहानियों में प्रायः अधिसंख्य कहानियाँ चर्चित रहीं, चालीस बरस बाद आज भी चर्चा में आ जाती हैं। मैंने अपने मित्रों, अज़ीज़ लेखकों, युवा लेखकों और युवा आलोचकों की राय से जो दस कहानियाँ चुनी हैं, वे इस संकलन में शामिल की जा रही हैं। अपनी कहानियों की गुणवत्ता का बखान करना या उनका मूल्यांकन करना यहाँ अभीष्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह एक अटपटा और दुविधापूर्ण काम है। आप कितना भी बचाकर यह काम करें, किसी न किसी कोण से हास्यास्पद हो ही जाएगा। यह काम मैं अपने सुधी पाठकों को सौंपता हूँ। वही तय करेंगे कि उन्हें ये कहानियाँ कैसी लगीं।

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